क्या शेयर मार्केट में पैसा लगाना सही है?

पश्चिमी देशों में लगभग 40% से ज्यादा लोग शेयर बाजार में सक्रिय रूप से निवेश करते हैं। लेकिन यही आंकड़ा भारत में 5 से 10 प्रतिशत में है। इसी एक बार से हिसाब लगाया जा सकता है कि भविष्य में शेयर बाजार में कितनी ज्यादा ऑपच्यरुनिटीज उपलब्ध है। अभी जो भी लोग लंबी अवधि के लिए अच्छे शेयरों में निवेश करना शुरू कर देते हैं वह एक निश्चित अवधि के बाद एक अच्छा धन अर्जित कर सकते हैं।

आज हम विस्तार से जानेंगे कि क्या शेयर मार्केट में पैसा लगाना सही है। शेयर बाजार के फायदे और नुकसान (share market ke fayde aur nuksan) जानकर आप एक निर्णय पर आ सकते हैं कि क्या यहां आपको निवेश करना चाहिए या कोई और सुरक्षित निवेश का माध्यम जैसे कि बैंक एफडी ढूंढना चाहिए। क्योंकि शेयर बाजार में जोखिम हमेशा बना रहता है।

क्या शेयर बाजार में पैसा लगाना चाहिए?

आपने अनेकों बार देखा होगा कि आपके मित्र, रिश्तेदार या आपके सहयोगी शेयर मार्केट में निवेश द्वारा अच्छे रिटर्न प्राप्त कर चुके हैं। इन्हें देखकर आपके मन में भी शेयर मार्केट में निवेश करने की इच्छा जागृत होती होगी परंतु मुख्यतः दो कारणों से आप शेयर बाजार में निवेश करने से कतराते होंगे।

share market ke fayde aur nuksan


पहला कारण यह है की शेयर मार्केट में निवेश करना जोखिम पूर्ण प्रतीत होता है। दूसरा कारण यह है कि आपको नहीं पता होगा कि शेयर मार्केट में अकाउंट कैसे खोलें।

पहले प्रश्न का उत्तर यह है कि जी हां शेयर बाजार में जोखिम होता है। अगर हम बैंक एफडी (Bank Fixed Deposit) की बात करें तो उसमें आपको निश्चित रिटर्न जो कि आम तौर पर 6 प्रतिशत होते हैं बिना किसी जोखिम के आपको साल के बाद मिल जाते हैं।

लेकिन अगर वही पैसा आप शेयर बाजार में लगाते हैं तो वहां पर आपको रिटर्न निश्चित नहीं मिलते हैं और साथ ही में अगर शेयर बाजार गिर जाता है तो पैसा कम होने के जोखिम होते हैं।

लेकिन यहां पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि महंगाई की दर तकरी 6% या उससे ज्यादा के हिसाब से बढ़ रही है जिसका मतलब है कि बैंक FD में मिलने वाले रिटर्न आपको महंगाई से नहीं बचा सकते हैं। इसीलिए आपको कोई अतिरिक्त निवेश का साधन ढूंढना पड़ेगा। शेयर मार्केट में सुरक्षित माध्यमों में निवेश करने से आपको अच्छे रिटर्न मिल सकते हैं कुछ बार तो यह रिटर्न 25% तक चले जाते हैं।

शेयर मार्केट में अपने निवेश को डायवर्सिफाई (Diversify) करके ना केवल जोखिम से बच सकते हैं बल्कि अच्छे रिटर्न प्राप्त कर सकते हैं। साधारण भाषा में डायवर्सिफिकेशन का मतलब यह होता है कि स्टॉक मार्केट में होने वाले नुकसान की पूर्ति के लिए हम किसी अन्य निवेश साधन में निवेश करना शुरू कर देते हैं जिससे कि स्टॉक मार्केट गिरने पर हमें नुकसान ना हो।दूसरा मध्य हमें प्रॉफिट देना शुरू कर दे। 

उदाहरण के तौर पर शेयर बाजार में स्टॉक खरीदने के साथ ही हम ऑनलाइन सोने में निवेश करना शुरू कर देते हैं। अक्सर यह होता है कि जब स्टॉक मार्केट गिरता है तो सोने के भाव ऊपर जाते हैं और जब सोने के भाव नीचे आते हैं तो स्टॉक मार्केट ऊपर जाता है। तो इस तरह एक बैलेंस बन जाता है और हमें स्टॉक मार्केट में अंत में फायदा ही होता है। लेकिन यह तरीका लंबी अवधि के निवेश में होता है। अगर आप 10-15 साल निवेश में बने रह सकते हैं तो यहां डायवर्सिफिकेशन से आपको अच्छा फायदा हो सकता है डायवर्सिफिकेशन के लिए गवर्नमेंट बॉन्ड, गोल्ड ईटीएफ जैसे माध्यमों का उपयोग किया जा सकता है।

तो यहां पर आपके प्रश्न का उत्तर 'क्या शेयर बाजार में पैसा लगाना सही है (kya share market me paisa lagana sahi hai)' यह है कि जी हां बिल्कुल है।

अगर आप भविष्य में अपनी संपत्ति को बहुत ज्यादा बढ़ाना चाहते हैं तो थोड़ा रिस्क लेकर आप ऐसा कर सकते हैं। शेयर बाजार में निवेश करने से पहले अगर हम अच्छी तरह से इसकी जानकारी जुटा ले और अच्छे स्टॉक ही खरीदे पेनी स्टॉक (penny stock) से दूर रहे, नुकसान होने पर स्टॉपलॉस बुक करना सीख लें तो हम स्टॉक मार्केट से अच्छा पैसा कमा सकते हैं।

दूसरे प्रश्न का उत्तर यह है कि अगर आप नहीं जानते हैं कि स्टॉक मार्केट में कैसे पैसा लगाना है (share market me paisa kaise lagaye) तो इसका सरल उत्तर यह है कि इसके लिए आपको डिमैट अकाउंट खुलवाना पड़ेगा। आपकी जानकारी के लिए डिमैट अकाउंट ऑनलाइन खुल जाता है वह भी सिर्फ 15 मिनट में।

हम आपको जीरोधा (Zerodha) में अपना डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट खुलवाने की सलाह देंगे। क्योंकि यह भारत का नंबर वन डिस्काउंट स्टॉक ब्रोकर है और यह डिलीवरी ट्रेडिंग के लिए जीरो ब्रोकरेज लेते हैं। इनका ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म बहुत ही ज्यादा उन्नत है। आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके अपना जीरोधा अकाउंट अभी खोल सकते हैं।

जीरोधा आपको सीधे स्टॉक में इन्वेस्ट करने का मौका देता है और इसके साथ ही आप म्युचुअल फंड, आईपीओ (IPO), गवर्नमेंट बॉन्ड, गोल्ड बॉन्ड, गोल्ड ईटीएफ जैसे इन्वेस्टमेंट इंस्ट्रूमेंट में भी निवेश कर सकते हैं।

तो चली अभी जानते हैं शेयर बाजार के फायदे और नुकसान (share market ke fayde aur nuksan) जिससे कि आपको पूरी तरह से जानकारी मिल जाए कि क्या यहां पर आपको निवेश करना चाहिए या पुराने तरीके जैसे कि बैंक Fixed Deposit के साथ ही रहना चाहिए।

शेयर मार्केट के फायदे - Share market ke fayde

  • आसान प्रक्रिया: शेयर बाजार में निवेश करना बहुत ही आसान हो चुका है। आपको सिर्फ 15 मिनट में अपना डिमैट अकाउंट ओपन करना होता है और उसके बाद आप निवेश करना शुरू कर सकते हैं। निवेशक एक ही स्थान से शेयर मार्केट में खरीद-फरोख्त कर सकते हैं तथा सभी गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं। सभी स्टॉक एक्सचेंज निवेशकों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम के द्वारा ट्रेडिंग करने की सुविधा प्रदान करते हैं। डीमैट अकाउंट निवेशकों को अपने सभी सिक्योरिटी सर्टिफिकेट को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम के रूप में संग्रहित करने की सुविधा प्रदान करता है।
  • अच्छे शॉर्ट टर्म रिटर्न: शेयर मार्केट में उपलब्ध वित्तीय साधन फिक्स्ड डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट आदि के मुकाबले शॉर्ट टर्म में ज्यादा प्रॉफिटेबल साबित होते हैं। यदि शेयर मार्केट में अनुशासन, संयम एवं योजना के साथ निवेश किया जाए तो यह निवेशकों के जोखिम को सीमित करता है एवं अच्छे रिटर्न प्रदान करता है।
  • लिक्विडिटी: यहां पर लिक्विडिटी (liquidity)) बहुत ज्यादा होती है। जिसका मतलब है कि स्टॉक खरीदने और स्टॉक बेचने वालों की संख्या बहुत ज्यादा होती है। इससे यह फायदा होता है कि आप कभी भी स्टॉक को खरीद सकते हैं और आसानी से कभी भी बेच सकते हैं। ज्यादा लिक्विडिटी निवेशकों की शेयर मार्केट में खरीद-फरोख्त करने में मदद करती है। शेयर मार्केट में अधिकतर कंपनियां नेशनल स्टॉक एक्सचेंज एवं बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के प्लेटफार्म से ही अपने शेयर की ट्रेडिंग करती हैं। इसलिए उच्च वॉल्यूम होने के कारण यह निवेशकों को उच्च लिक्विडिटी प्रदान करती हैं।
  • उन्नत अर्थव्यवस्था: ग्लोबल आंकड़ों के मुताबिक भारत एक बहुत ही तेजी से बढ़ाने वाली अर्थव्यवस्था है और आने वाले कुछ सालों में भारत सबसे अच्छी अर्थव्यवस्था बन सकता है। इसका सीधा-सीधा यह मतलब है कि भारत में निवेश के बहुत ही ज्यादा मौके हैं। अच्छी कंपनियों में निवेश करके आप ना उनके स्टॉक ही नहीं खरीदते हैं बल्कि आप उस कंपनी के भागीदारी बन जाते हैं। और अगर वह कंपनी भविष्य में अच्छा काम करेगी तो आपको अच्छे रिटर्न मिलने की संभावना ज्यादा होती है। शेयर मार्केट में निवेशकों द्वारा उभरती हुई अर्थव्यवस्था का लाभ उठाया जाता है। ऐसी अफसर का लाभ अक्सर विदेशी निवेशक ज्यादा उठाते हैं यही कारण है कि भारत में विदेशी निवेश बहुत ज्यादा हो रहा है। शेयर मार्केट एवं अर्थव्यवस्था एक दूसरे से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित होते हैं। अर्थव्यवस्था में सुधार के अनुपात में निवेश में वृद्धि होती है और साथ ही निवेशकों को प्राप्त होने वाले रिटर्न में भी वृद्धि देखने को मिलती है।
  • डिविडेंड: डिविडेंड का अर्थ लाभांश होता है। डिविडेंड का अर्थ कंपनी के लाभ का वह भाग होता है जो शेयरधारकों को उनके शेयर की संख्या के अनुपात में दिया जाता है। एक कंपनी के लाभांश को निदेशक मंडल द्वारा सुनिश्चित किया जाता है। कंपनी द्वारा एक रिकॉर्ड डेट भी सुनिश्चित की जाती है तथा उस रिकॉर्ड डेट के समय पंजीकृत शेयरधारकों को ही लाभांश प्रदान किया जाता है। शेयर मार्केट में पूर्व स्थापित कंपनियां जिनके पास निवेश के लिए अतिरिक्त धन होता है वह अपने शेयरधारकों को निरंतर एवं उचित लाभांश प्रदान करती हैं। अनेकों बार कंपनियों द्वारा शेयरधारकों को अतिरिक्त लाभांश भी प्रदान किए जाते हैं।
  • मुद्रास्फीति एवं करों के नकारात्मक प्रभाव को सीमित करना: शेयर मार्केट निवेशकों को दो प्रकार से लाभान्वित करती है; पूंजीगत लाभ के द्वारा एवं लाभांश के द्वारा। पूंजीगत लाभ एवं लाभांश पर लगने वाले कर की दर मासिक आय पर लगने वाले कर की दर से कम होती है। शेयर मार्केट में अनेकों कंपनियों द्वारा अपने शेयरधारकों को एक से अधिक बार डिविडेंड प्रदान किए जाते हैं। पूंजीगत लाभ, लाभांश एवं अतिरिक्त लाभांश के द्वारा ना केवल शेयर धारक को सुखद रिटर्न प्राप्त होते हैं अपितु मुद्रास्फीति एवं करो का नकारात्मक प्रभाव भी कम होता है।
  • लाभ: शेयर मार्केट में निवेश द्वारा प्राप्त होने वाले लाभ अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू है। शेयर मार्केट में वे कंपनियां है जो निरंतर मुनाफा कमा रही होती हैं, ऐसी कंपनियां निवेशकों को अच्छे रिटर्न प्रदान करती हैं।
  • डायवर्सिफिकेशन: शेयर मार्केट में उपलब्ध वित्तीय साधन (शेयर्स, म्यूच्यूअल फंड्स, डेरिवेटिव्स एवं बॉन्डस) निवेशकों को अनेकों विकल्प प्रदान करता है। इन उपलब्ध विकल्पों के चुनाव द्वारा निवेशक न केवल अत्यधिक रिटर्न प्राप्त करते हैं अपितु जोखिम से भी बचे रहते हैं।
  • सुरक्षित निवेश: भारत की सभी स्टॉक एक्सचेंज का विनियमन स्टॉक एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) द्वारा किया जाता है। विनियमन प्रारूप के अंतर्गत निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए सेबी द्वारा स्टॉक मार्केट की निगरानी एवं नियंत्रण किया जाता है।
  • स्वामित्व एवं मतदान का अधिकार: शेयर मार्केट में निवेश के साथ ही निवेशकों को उनके द्वारा खरीदे गए शेयर की संख्या के आधार पर स्वामित्व एवं मतदान का अधिकार प्राप्त होता है। शेयरधारकों के ऐसे अनेकों उदाहरण देखने को मिलेंगे जिनमें उनके द्वारा लिए गए निर्णय कंपनी के लिए हितकारी साबित हुए हैं।
  • निवेश में लचीलापन: शेयर मार्केट में निवेशक अपनी क्षमता के अनुसार निवेश कर सकते हैं। निवेशक किसी भी प्रकार से न्यूनतम एवं अधिकतम निवेश के लिए बाध्य नहीं होते हैं। निवेशक किसी भी प्रकार के स्टॉक (लार्ज कैप, मिड कैप, स्माल कैप) की ट्रेडिंग कर सकते हैं।
  • दीर्घ अवधि वाले रिटर्न: शेयर मार्केट में निवेशक दीर्घावधि वाले रिटर्न प्राप्त करने के उद्देश्य से भी निवेश करते हैं। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए निवेशकों द्वारा शेयर खरीदे जाते हैं एवं एक दीर्घ अंतराल के दौरान उन के दामों में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी देखते हुए उन शेयर को बेचा जाता है जिनसे उन्हें पूंजीगत लाभ प्राप्त होता है। यह पूंजीगत लाभ ही उनका दीर्घकालिक रिटर्न होता है।
  • ग्लोबल निवेशक: शेयर मार्केट सभी निवेशकों को विश्व की उन सभी कंपनियों में निवेश करने का अवसर प्रदान करती है जो कि भारतीय स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध है तथा इसके द्वारा उन्हें सुखद रिटर्न प्रदान करती है।

शेयर मार्केट के नुकसान - Share market ke nuksan

ऐसा नहीं है कि बाजार में निवेश करने से फायदा ही हो आप शेयर मार्केट के नुकसान के बारे में जरूर पढ़ें।

शेयर मार्केट में निवेश करने का सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि जिस भी कंपनी में आप निवेश कर रहे हैं उसकी डूबने की संभावना बनी रहती है। अगर कंपनी डूब जाएगी तो आपको नुकसान झेलना पड़ेगा जो स्टॉक अपने मान लीजिए ₹100 पर लिया है तो शायद हो सकता है आपको ₹80 पर बेचना पड़े और अगर आप उसे ₹80 पर टाइम पर नहीं बेचते हैं तो हो सकता है इस स्टॉक को आपको ₹50 पर बेचना पड़े।

रातों रात किसी स्टॉक का मूल्य जीरो होने की संभावना बिल्कुल नहीं होती है। कोई भी स्टॉक जब गिरता है तो धीरे-धीरे गिरता है और आपको जब जानकारी हो कि यह कंपनी डूबने जा रही है तो आप टाइम पर थोड़ा नुकसान बुक करके एग्जिट कर सकते हैं।

यहां पर ध्यान देने वाली सबसे बड़ी बात यह है कि स्टॉक मार्केट में अगर आप निवेश करते हैं तो यहां पर जोखिम बहुत कम होता है। लेकिन अगर आप ट्रेडिंग करते हैं तो वहां पर बहुत ज्यादा जोखिम होता है। SEBI के आंकड़ों के हिसाब से 100 में से 90% ट्रेडर हमेशा लॉस ही करते हैं और दो-तीन महीने में अपना अकाउंट के सारे पैसे उड़ा देते हैं। इसीलिए हम आपको सलाह देंगे कि अगर मार्केट में नए हैं तो निवेश से शुरू करें और मार्केट में अच्छी तरह से जानकारी प्राप्त करने के बाद ही ट्रेडिंग शुरू करें।

शेयर मार्केट में उचित कंपनियों में निवेश एवं उचित वित्तीय साधनों के विविधीकरण द्वारा निवेशक उचित लाभ अर्जित कर सकते हैं। शेयर मार्केट में अनुशासन, संयम एवं योजना के साथ किया गया निवेश, निवेशकों के लिए अत्यंत फायदेमंद सिद्ध होता है।